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मैं ग़र ढलती संध्या ,तो तुम्हे सुबह का सूरज लिख दूँ..
मैं ग़र गर्मी की तपिश,तो तुम्हें सावन की फुहार लिख दूँ ..
मैं ग़र धरा,तो तुम्हें नीला आकाश लिख दूँ..
मैं ग़र आगाज़ नया ,तो तुम्हें खूबसूरत अंजाम लिख दूँ..
मैं ग़र पंख बेबाक ,तो तुम्हें ऊँचा परवाज़ लिख दूँ..
मैं ग़र नदी इठलाती ,तो तुम्हें गहरा सागर लिख दूँ..
मैं ग़र फूल कोमल ,तो तुम्हें मस्त बहार लिख दूँ..
मैं ग़र रात अन्धयारी ,तो तुम्हें चंदा चकोरा लिख दूँ..
मैं ग़र हृदय अपार, तो तुम्हें धड़कन हर बार लिख दूँ..
मैं ग़र श्वांस जीवन की,तो तुम्हें प्राणों का सार लिख दूँ..
मैं ग़र तरंग सप्तरंगी,तो तुम्हें सुनहेरी उमंग लिख दूँ..
मैं ग़र ख्वाहिश अधूरी ,तो तुम्हें मुकम्मल ख्वाब लिख दूँ..
मैं ग़र शब्द निरर्थक ,तो तुम्हें अर्थ सार्थक लिख दूँ..
मैं ग़र बिखरे अल्फ़ाज़,तो तुम्हें मधुर कविता लिख दूँ..
मैं ग़र उलझन बेहिसाब ,तो तुम्हें सुकून लिख दूँ ..
मैं ग़र नैना सूने,तो तुम्हें कजरे की धार लिख दूँ..
मैं ग़र पाक इबादत ,तो तुम्हें रहमते खुदा लिख दूँ..
मैं ग़र तन मिट्टी का,तो तुम्हें अमर आत्मा लिख दूँ..